जीवन में योग के महत्व

योग के बिना मानव जीवन बेकार है या यूं कह सकते हैं बिना योग के स्वच्छ और सुंदर मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती | अगर किसी व्यक्ति को उम्र भर स्वस्थ और सुंदर रहना है तो उसका एक ही उपाय है और वह है योग | प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में योग को अपनाना चाहिए, चाहे वह बच्चा हो बूढ़ा हो या फिर जवान हो उसे प्रतिदिन कम से कम यह पांच व्यायाम और योगासन जरूर करने चाहिए|

योग करने से कई तरह के फ़ायदे होते हैं, जैसे कि

 शारीरिक और मानसिक रूप से मज़बूती,

तनाव कम होना, और कई बीमारियों से राहत मिलना. 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने का तरीका: 

  1. पदमासन में बैठें.
  2. बाईं हथेली को बाएं घुटने पर रखें.
  3. ज्ञान या चिन्न मुद्रा में और दाहिने हाथ की नसाग्र मुद्रा बनाएं.
  4. बची हुई सांस को बाहर निकाल दें.
  5. बाईं नासिका से सांस भरें.
  6. सांस भरते हुए पहले पेट फुलाएं और फिर छाती फुलाएं.
  7. अनामिका से बाईं नासिका को बंद कर दीजिए.
  8. दाईं नासिका से अंगूठे को हटा लीजिए और पूरी सांस को बाहर निकाल दीजिए.

अनुलोम-विलोम प्राणायाम के फ़ायदे: 

  • शरीर और मन को शांति मिलती है.
  • तनाव और चिंता को कम करता है।
  • सेहत में सुधार होता है.
  • पूरे शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है।
  • मानसिक संतुलन बना रहता है.
  • रोग-प्रतिकारक शक्ति बढ़ती है.
  • हार्ट की ब्लॉकेज खुलती है.
  • हाई और लो दोनों तरह का रक्तचाप ठीक हो जाता है.
  • सांस लेने और छोड़ने का तरीका सही होता है.
  • फेफड़े शक्तिशाली होते हैं।
  • सर्दी, जुकाम व दमा की शिकायतों से काफी हद तक बचाव होता है।
  • हृदय बलवान होता है।
  • गठिया के लिए फायदेमंद है।
  • पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।

कपालभाति एक प्राणायाम है. यह हठयोग की एक विधि है. कपाल का मतलब होता है माथा और भाति का मतलब होता है तेज. इस प्राणायाम को करने से मस्तिष्क स्वच्छ होता है और उसकी कार्यप्रणाली बेहतर होती है. 

कपालभाति करने का तरीका: 

  1. वज्रासन या पद्मासन में बैठें.
  2. दोनों हाथों से चित्त मुद्रा बनाएं और घुटनों पर रखें.
  3. गहरी सांस लें और फिर झटके से सांस छोड़ते हुए पेट को अंदर की ओर खींचें.
  4. ऐसा कुछ मिनट तक लगातार करें.
  5. कपालभाति करने के बाद थोड़ी देर ताली बजाएं.

कपालभाति करने के फ़ायदे:

  • यह फेफड़ों, लीवर, पैनक्रियाज़, और दिल के काम में सुधार करता है. 
  • यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. 
  • यह धमनी के अवरोध को दूर करने में मदद करता है. 
  • यह तंत्रिका तंत्र के लिए भी अच्छा माना जाता है. 
  • यह वायुमार्ग को साफ़ करके और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करके अस्थमा और अन्य श्वसन समस्याओं के लिए फ़ायदेमंद है. 
  • यह पाचन में भी सहायता करता है. 

कपालभाति करने का सबसे अच्छा समय सुबह होता है. 

भ्रामरी प्राणायाम, मधुमक्खी की तरह गुंजन करने वाली सांस लेने की एक योगिक तकनीक है. इसे मधुमक्खी श्वास भी कहते हैं. यह तनाव कम करने और बेहतर नींद लाने में मददगार है. 

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका: 

  1. शांत और हवादार जगह पर बैठ जाएं.
  2. आंखें बंद कर लें.
  3. तर्जनी उंगलियों को दोनों कानों पर रख लें.
  4. मुंह बंद रखते हुए नाक से सांस लें और बाहर छोड़ें.
  5. सांस छोड़ते समय ऊँ का उच्चारण करें.
  6. इस प्रक्रिया को 5-7 बार दोहराएं.

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ: 

  • तनाव कम करता है.
  • विश्राम को बढ़ावा देता है.
  • दर्द, क्रोध, चिंता, बेचैनी को कम करता है.
  • बेहतर नींद लाने में मदद करता है.
  • गुनगुनाने से इंद्रियों को वापस खींचने (प्रत्याहार) और एकाग्रता (धारणा) में मदद मिलती है.

भ्रामरी प्राणायाम को सभी उम्र और फिटनेस स्तर के लोग कर सकते हैं. इसे खाली पेट ही करना चाहिए. 

सूर्य नमस्कार, योग का एक अभ्यास है. इसमें 12 योगासनों का एक क्रम होता है. इसे सूर्य को नमस्कार या अर्पण भी कहा जाता है. यह एक कार्डियो-वैस्कुलर व्यायाम भी है. सूर्य नमस्कार करने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं. 

सूर्य नमस्कार करने का तरीकाः 

  1. सांस अंदर लेते हुए सीधे खड़े हों.
  2. हाथों को ऊपर उठाएं.
  3. कूल्हों को थोड़ा बाहर की ओर धकेलते हुए थोड़ा पीछे की ओर झुकें.
  4. सांस छोड़ते हुए पहले शरीर को सीधा करें, फिर हाथों को नीचे लाएं.
  5. इस स्थिति में आराम करें.

सूर्य नमस्कार के फ़ायदेः 

  • शारीरिक और मानसिक मज़बूती बढ़ती है.
  • शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है.
  • मस्तिष्क की सक्रियता और एकाग्रता को स्थयित्व प्राप्त होता है.
  • सूर्य नमस्कार करने से शरीर को सही आकार मिलता है.
  • मन शांत और स्वस्थ रहता है.

सूर्य नमस्कार करने का समयः
सूर्य नमस्कार का अभ्यास प्रातःकाल खाली पेट करना उचित होता है.

मंडूकासन को मेंढक मुद्रा भी कहा जाता है. यह पेट से जुड़ी कई समस्याओं के लिए फ़ायदेमंद होता है. इसे करने से पेट की चर्बी कम होती है, डायबिटीज़ में फ़ायदा होता है, और पेट के रोगों से आराम मिलता है. 

मंडूकासन करने का तरीका: 

  1. ज़मीन पर वज्रासन में बैठें.
  2. अपनी मुट्ठी बंद करें.
  3. अंगूठे को मुट्ठी के अंदर रखें.
  4. दोनों मुट्ठियों को नाभि के बीच में रखें.
  5. गहरी सांस लें.
  6. सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें.
  7. पेट को अंदर खींचें.
  8. छाती जांघों को छू रही हो, यह सुनिश्चित करें.
  9. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें.
  10. वापस वज्रासन की मुद्रा में आ जाएं.
  11. इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं.

मंडूकासन के फ़ायदे: 

रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है

पेट के रोगों में फ़ायदेमंद

डायबिटीज़ में फ़ायदेमंद

वज़न घटाने में मददगार

कब्ज़ और अपच को दूर करता है

पेट की कई बीमारियों के लिए फ़ायदेमंद

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